बलात्कारीयों को अब खैर नहीं मिलेगा मृत्युदंड की सजा.. मोदी सरकार के अध्यादेश को राष्ट्रपति ने दी मंजूरी।

अध्यादेश को राष्ट्रपति ने दी मंजूरी
अध्यादेश को राष्ट्रपति ने दी मंजूरी

देश में नाबालिग बच्चियों के साथ बढ़ती बलात्कार की घटनाओं पर देशभर में आवाज कब से उठ रही थी, देश वासियों के बढते आक्रोश को देखते हुए मोदी सरकार द्वारा जारी अध्यादेश पर आज राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 12 साल से कम उम्र की बच्चियों से बलात्कार के मामलों में दोषी व्यक्तियों को मृत्युदंड तक की सजा को राष्ट्रपति ने अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी।

गजट अधिसूचना में कहा गया है , संसद का सत्र अभी नहीं चल रहा है इस वजह से अध्यादेश लाया गया और राष्ट्रपति इस बात से संतुष्ट हैं कि जो अभी परिस्थितियां हैं उसे देखते हुये यह आवश्यक था।

संविधान के अनुच्छेद 123 के उपखंड 1 में दी गई शक्तियों का राष्ट्रपति ने उपयोग करते हुए इस अध्यादेश को मंजूरी दी है। अध्यादेश 2018 के अनुसार ऐसे मामलों से निपटने के लिये नयी त्वरित अदालतें गठित की जायेंगी और साथ मे सभी पुलिस थानों एवं अस्पतालों को बलात्कार मामलों की जांच के लिए विशेष फॉरेंसिक किट उपलब्ध करायी जायेगी।

अध्यादेश के मुताबिक इसमें विशेषकर 16 एवं 12 साल से कम उम्र की लड़कियों से बलात्कार के मामलों में दोषियों के लिये सख्त सजा की अनुमति है….. 12 साल से कम उम्र की बच्चियों से बलात्कार के दोषियों को मौत की सजा मुकर्रर है इस अध्यादेश के मुताबिक।

अध्यादेश के नियम के अनुसार महिलाओं से बलात्कार मामले में न्यूनतम सजा 7 से बढ़ा कर दस साल सश्रम कारावास की गई । लेकिन इसे अपराध की प्रवृत्ति को देखते हुए उम्रकैद तक भी बढ़ाया जा सकता है ताकि अपराधी ऐसी हरकतें करने से पहले 1000 बार सोचें।

16 साल से कम उम्र की लड़कियों से सामूहिक बलात्कार के दोषी के लिये उम्रकैद की सजा का बरकरार रहेगा इसमे कोई बदलाव नहीं किया गया है।

इस अध्यादेश के हिसाब से 16 साल से कम उम्र की लड़कियों के बलात्कार के मामले में न्यूनतम सजा (दस) साल से बढ़ाकर (बिस) साल की गई और अपराध की प्रवृत्ति के आधार पर इसे बढ़ाकर जीवन भर कारावास की सजा भी मिल सकता, यानी दोषी को मौत होने तक जेल की सजा होगी….मतलब पूरी जिन्दगी जेल में ही बिताना पड़ेगा।

अध्यादेश में मामले की त्वरित जांच एवं सुनवाई की भी व्यवस्था है। मतलब इस अध्यादेश के मुताबिक बलात्कार के सभी मामलों में सुनवाई पूरी करने की समय सीमा 2 माह होगी। साथ में 16 साल से कम उम्र की लड़कियों से बलात्कार या सामूहिक बलात्कार के आरोपी व्यक्ति को अंतरिम जमानत नहीं मिल सकेगी।

इस अध्यादेश में यह भी प्रावधान किया गया है कि सोलह साल से कम उम्र की लड़की के साथ बलात्कार के मामलों में जमानत आवेदनों पर फैसला करने से पहले अदालत को सरकारी वकील और पीड़िता के प्रतिनिधि को 15 दिनों का नोटिस देना होगा।

सूत्रों के मुताबिक, बलात्कार के मामलों में सख्त से सख्त सजा सुनिश्चित करने के लिए देश की न्यायपालिका की शक्तियां बढ़ाने के साथ ही कैबिनेट ने कई दूसरे कदमों को भी मंजूरी दी है।

2 Replies to “बलात्कारीयों को अब खैर नहीं मिलेगा मृत्युदंड की सजा.. मोदी सरकार के अध्यादेश को राष्ट्रपति ने दी मंजूरी।”

  1. I know!? Stated Laгry. ?I wager he likes angels
    because he has tһem round all the tіme. Maybe he and the angels play household games like we do sometimes.
    Possibly they play Monopoⅼʏ.? This made Mommy chortle actᥙally hard.

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